संथाल परगना के लोहरा जाति का संक्षिप्त परिचय
(क) जनजातियों के गाँव में कृषको से मिलजुल कर रहना तथा जनजातीय समतुल्य अपना घर-मकान बना कर रहना |
(ख) अन्य जनजातियों की तरह लता-कपड़ा पहनना, आभूषणों का व्यवहार करना तथा गोदना गोदवाना |
(ग) सं०प० में सभी छ: जिलों में अपनी स्वजातीय भाषा का व्यवहार समान रूप से करना, अन्य जन जाति की भाषा का ज्ञान रखना हिंदी एवं बंगला भाषा समझना एवं बोलना |
(घ) जन्म संस्कार - दाय के द्वारा नाभि छेदन, नाभि को जमीन पर गाड़ना, छः दिन या नौ दिन पर छट्ठी (नारता) करना, परिवार के बुजुर्गो द्वारा नामकरण करना, नामकरण में दो नाम देना, स्वजाति सदस्य द्वारा कर्ण छेदन करना |
(ङ) वेवाहित रीती - अन्य जनजातियों के तरह वर को धोती अंगुठी देना,कन्या को साड़ी - साया,ब्लाऊज,माला पहना कर गठबंधन (चोंड़का) का रस्म ऐडा करना, मण्डपाच्छादन तथा माड़वा वेदी पत्र सखुआ,महुआ की डाल स्थापित करना, पानी भरना (दाक़ बापला) जोंट धोवाना, दाहिने हाथ पर आम के पत्तों का कंगन बाँधना, बाराती विदाई के समय माता द्वारा लड़के को अपना स्तनपान करा कर लड़की के घर प्रास्थान के लिए विदा करना, लड़की पक्ष द्वारा आगमन तक बारातियों का स्वागत करना,कंधे पर चढ़कर सारा धोती प्रदान करना, लड़की के मांड़वा के निचे दोनों संधियों का सखुआ के पतल पर बैठना, वर एवं कन्या अपने-अपने पिताओं के जाँख पर बैठकर सिन्दुरदान करना |
(क) जनजातियों के गाँव में कृषको से मिलजुल कर रहना तथा जनजातीय समतुल्य अपना घर-मकान बना कर रहना |
(ख) अन्य जनजातियों की तरह लता-कपड़ा पहनना, आभूषणों का व्यवहार करना तथा गोदना गोदवाना |
(ग) सं०प० में सभी छ: जिलों में अपनी स्वजातीय भाषा का व्यवहार समान रूप से करना, अन्य जन जाति की भाषा का ज्ञान रखना हिंदी एवं बंगला भाषा समझना एवं बोलना |
(घ) जन्म संस्कार - दाय के द्वारा नाभि छेदन, नाभि को जमीन पर गाड़ना, छः दिन या नौ दिन पर छट्ठी (नारता) करना, परिवार के बुजुर्गो द्वारा नामकरण करना, नामकरण में दो नाम देना, स्वजाति सदस्य द्वारा कर्ण छेदन करना |
(ङ) वेवाहित रीती - अन्य जनजातियों के तरह वर को धोती अंगुठी देना,कन्या को साड़ी - साया,ब्लाऊज,माला पहना कर गठबंधन (चोंड़का) का रस्म ऐडा करना, मण्डपाच्छादन तथा माड़वा वेदी पत्र सखुआ,महुआ की डाल स्थापित करना, पानी भरना (दाक़ बापला) जोंट धोवाना, दाहिने हाथ पर आम के पत्तों का कंगन बाँधना, बाराती विदाई के समय माता द्वारा लड़के को अपना स्तनपान करा कर लड़की के घर प्रास्थान के लिए विदा करना, लड़की पक्ष द्वारा आगमन तक बारातियों का स्वागत करना,कंधे पर चढ़कर सारा धोती प्रदान करना, लड़की के मांड़वा के निचे दोनों संधियों का सखुआ के पतल पर बैठना, वर एवं कन्या अपने-अपने पिताओं के जाँख पर बैठकर सिन्दुरदान करना |
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